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सदस्यों का परिचय

श्रीमती रेखा शर्मा
अध्यक्षा 7 Aug 2018

श्रीमती रेखा शर्मा ने तारीख 7 अगस्‍त, 2018 को राष्‍ट्रीय महिला आयोग के अध्‍यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया। उनकी कार्यशैली की दो प्रमुख विशेषताएं जो अनायास ही दृष्टिगोचर होती हैं वे हैं उनकी दृढ़ इच्‍छा शक्ति और नेतृत्‍व की भावना। जरूरतमंद महिलाओं के लिए हमेशा तैयार रहने के उनके अग्रणी प्रयासों के कारण राष्‍ट्रीय महिला आयोग को महिलाओं के मुद्दों के समाधान के लिए चौबीसों घंटे काम करने के लिए जाना जाता है।

श्रीमती शर्मा अगस्‍त 2015 को राष्‍ट्रीय महिला आयोग के सदस्‍य के रूप में प्रतिष्ठित हुईं और 7 अगस्‍त, 2018 को आयोग की अध्‍यक्ष बनने से पहले वह दिनांक 29 सितंबर, 2017 से राष्‍ट्रीय महिला आयोग की अध्‍यक्ष (प्रभारी) भी रही थीं।

राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने उनके नेतृत्‍व में नए मील के पत्‍थर स्‍थापित किए हैं क्‍योंकि वह नवीनतम कानूनी सेवाओं के माध्‍यम से महिलाओं को सशक्‍त बनाने के लिए राष्‍ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के साथ आयोग के अभियान के नवीनतम मामलों में रही है जिसे 74वें स्‍वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर शुरू किया गया था। इस अभियान का उद्देश्‍य देश के दूरदराज से खासतौर पर महिलाओं को कानूनी रूप से सशक्‍त बनाना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की एक विस्‍तृत श्रृंखला की मदद से इसे आठ राज्‍यों में आरंभ किया गया था और यथासंभव अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंच बनाने के लिए अभियान सामग्री का अनुवाद मातृभाषा में किया जाएगा।

श्रीमती शर्मा समाज के परिप्रेक्ष्‍य को ढालने की प्रबल पक्षधर रही हैं और इसलिए आयोग नियमित रूप से छात्रों के लिए महिलाओं से संबंधित कानूनों पर राज्‍य और राष्‍ट्रीय स्‍तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है ताकि उन्‍हें लैंगिक समानता की अवधारणा के करीब लाया जा सके। उनके नेतृत्‍व में आयोग ने केंद्रीय और राज्‍य वि‍श्‍वविद्यालयों के 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए केंद्रीय विद्यालय संगठनों के साथ मिलकर विधिक जागरूकता कार्यक्रम भी विकसित किया है।

महामारी के असामान्‍य समय के दौरान भी, जब देश को लॉकडाउन के तहत रखा गया था तब उनके नेतृत्‍व में राष्‍ट्रीय महिला आयोग महिलाओं के सामने आने वाली नई चुनौतियों को दूर करने के अपने त्‍वरित उपायों के साथ खड़ी थी। आयोग ने अपने मार्गदर्शन में महिलाओं के लिए अपनी तरह का एक व्‍हाट्सएप हेल्‍पाइन नंबर लॉन्‍च किया है, जिसमें पहले से ही सुदृढ़ शिकायत पंजीकरण भी शामिल है। वह महामारी के दौरान एक विशेष हैप्‍पी  टू हेल्‍प टास्‍कफोर्स की स्‍थापना करने में भी अग्रणी थी, जो घर पर अकेले बंद पड़ी बुजुर्गों की मदद करने के लिए उन्‍हें मेडिकल आपात स्थिति में और किराने का सामान और दवाओं जैसी आवश्‍यक जरूरतों की खरीद में मदद करती थी।

महिलाओं को स्‍वतंत्र और आत्‍मनिर्भर बनाने के उनके उद्देश्‍य के अनुरूप, राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने फेसबुक और साइबर पीस गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की साझेदारी में एक डिजीटल साक्षरता और ऑनलाइन संरक्षा कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें अब तक हजारों महिलाओं को गलत सूचना प्रदान करने और साइबर अपराधों से लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया गया है इस वर्ष इसका लक्ष्‍य कई गुना बढ़ जाने की संभावना है।

जब भारत के सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने हाल ही में यह माना कि हिंदू महिलाओं को पुरूषों के साथ अपनी पैतृक संपत्ति में संयुक्‍त कानूनी वारिस होना था, तो यह महिलाओं के लिए समान संपत्ति अधिकारों के लिए उनकी अलग वकालत की जीत भी थी। उनके नेतृत्‍व में आयोग ने महिलाओं से संबंधित कुछ महत्‍वपूर्ण कानूनों की समीक्षा की है जैसे महिलाओं के संपत्ति अधिकार। राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं का कार्यस्‍थल पर लैंगिक उत्‍पीड़न अधिनियम और माताओं के अभिभावक अधिकारों की समीक्षा की है जिसके बाद मंत्रालय को सिफारिशें भेजी गई थी।

आयोग ने महिला श्रमिकों पर मौजूदा कानून, एफएलएफपीआर पर बाल संरक्षण नीतियों के प्रभाव, एफएलएफपीआर में गिरावट के कारकों और इस गिरावट को दूर करने के लिए नीतिगत दृष्टिकोण पर चर्चा करने के लिए ‘महिला श्रम बल भागीदारी दर (एफएलएफपीआर) पर परामर्श आयोजित किया है।

राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने ‘आपदा में महिलाएं और बच्‍चे’ नीति निर्माण पर भी एक परामर्श का आयो‍जन किया क्‍योंकि आपदा के मामलों में महिलाएं और बच्‍चे बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। लोक समाज के 48 प्रतिनिधि, राज्‍य महिला आयोगों, राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्‍ट्रीय आपदा राहत बल, राष्‍ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्‍थान, राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग और एनसीपीसीआर ने विचार-विमर्श में भाग लिया।

राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने हाल ही में महिलाओं के लिए मातृत्‍व और मां विवाह योग्‍य आयु जहां कुछ प्रमुख पहलू जैसे कि विवाह की बढ़ती उम्र के सामाजिक विधिक निहितार्थ, सम्‍मति आयु और युवा लोगों के यौन और प्रजनन स्‍वास्‍थ्‍य के अधिकार पर प्रभाव पर समीक्षा करने के लिए एक वेबिनार आयोजित किया।

उन्‍होंने उत्‍तर पूर्वी महिलाओं के कल्‍याण के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है, जो छात्रों को उनके अधिकारों से सज्जित करने और उनके खिलाफ लक्षित अपराधों से निपटने के लिए कानूनी सहायता देने के लिए आउटरीच कार्यक्रम चला रही हैं। उन्‍होंने महानगरों में रहने वाली उत्‍तर पूर्वी क्षेत्र की महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर एक महा वेबिनार आयोजित किया था, जिसमें मंत्रालयों, गैर सरकारी संगठनों और अन्‍य नागरिक समाज संगठनों के विशिष्‍ट अधिकारियों की भागीदारी देखी गई थी। आयोग ने अंतर्राज्‍यीय महिला प्रवासी श्रमिकों से संबंधित कानूनों और उनके सामने आने वाली चुनौतियों की समीक्षा भी की है।

उन्‍होंने नियमित रूप से महिलाओं की समस्‍याओं के प्रभावी समाधान के लिए समाज और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मानसिकता को बदलने की आवश्‍यकता पर जोर दिया है और इसके एक हिस्‍से के रूप में, राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने लगभग हर राज्‍य में पुलिस अधिकारियों के लिंग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं।  

राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने कानून प्रवर्तन प्राधिकारियों के लिए राज्‍य पुलिस विभागों के साथ मिलकर पिछले वर्ष कई लिंग जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की।

इसके अतिरिक्‍त, उन्‍होंने देशभर में महिला जन सुनवाइयों/जन सुनवाई की एक बड़ी संख्‍या  की अध्‍यक्षता की है और महिला कैदियों से संबंधित मुद्दों को हल किया है, जिसमें जांच अधीन स्थितियों में सुधार करना शामिल है।

श्रीमती शर्मा की अध्‍यक्षता वाली जांच समितियां हिंसा के पीडितों को न्‍याय दिलाने में महत्‍वपूर्ण रही हैं।

उन्‍होंने 30 पुलिस प्रमुखों और प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, जिसमें कोविड के समय में घरेलू हिंसा से संबंधित मामलों के त्‍वरित निवारण को सुनिश्चित करने के साथ-साथ अन्‍य मुद्दों पर जोर दिया गया, जैसे कि महिला प्रवासी श्रमिकों की समस्‍याओं, महिलाओं के विरूद्ध साइबर अपराध आदि।

श्रीमती शर्मा ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत कार्यशील, स्‍वाधार गृह के निरीक्षण में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयोग ने एक व्‍यापक प्रोफार्मा विकसित किया है जो देश भर में 404 स्‍वाधार गृह (एसजीएस) को भेजा गया था, ताकि उनके कामकाज के विभिन्‍न पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्‍त की जा सके।

राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने नीति आयोग द्वारा घोषित आकांक्षापूर्ण जिलों के तहत सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं के उचित निष्‍पादन की भी समीक्षा की है। आयोग के सदस्‍यों ने इन जिलों का दौरा किया और केंद्र की महिलाओं संबंधित योजनाओं के प्रभावी कार्यान्‍वयन पर एक अनुपालन रिपोर्ट तैयार किया।

अनिवासी भारतीय विवाहों से संबंधित मुद्दों के बारे में लोगों को सूचित करने के लिए आयोग ने पंजाब स्‍कूल ऑफ लॉ और राष्‍ट्रीय महिला केंद्र, पंजाबी विश्‍वविद्यालय, पटियाला के साथ मिलकर अपमानजनक अनिवासी भारतीय विवाह में फंसी महिलाओं के लिए उपलब्‍ध कानूनी उपायों की प्रभावशीलता पर जागरूकता फैलाने के लिए एक राष्‍ट्रीय संगोष्‍ठी का आयोजन किया था।

राष्‍ट्रीय महिला आयोग नियमित रूप से विभिन्‍न राज्‍यों के पुलिस विभागों के साथ मिलकर महिला पुलिस अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करता है।

महिला प्रकोष्‍ठों के खिलाफ अपराध के अलावा, राष्‍ट्रीय महिला आयोग के अध्‍यक्ष और माननीय सदस्‍यों ने केंद्रों के कामकाज को देखने के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत कार्यरत वन स्‍टॉप सेंटरों का भी दौरा किया है।

अध्‍यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के पश्‍चात्, आयोग अपने राज्‍य आयोगों के साथ निकट समन्‍वय में काम कर रहा है, ताकि महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों से निपटने में उनकी दक्षता बढ़ सके। राष्‍ट्रीय महिला आयोग ने राज्‍य महिला आयोगों के लिए लाल बहादुर शास्‍त्री राष्‍ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी, उत्‍तराखंड में क्षमता निर्माण कार्यशालाओं का आयोजन किया था, जैसे कि लैंगिक समानता, महिलाओं से संबंधित कानून और महिला एवं बाल आयोगों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियां।

उनके अधीन, आयोग ने जेल के निरीक्षण के लिए एक प्रोफार्मा तैयार किया और एक रिपोर्ट तैयार की जिसे विभिन्‍न मंत्रालयों और जेल अधिकारियों के साथ साझा किया गया और उनसे कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया। उन्‍होंने जेलों से प्राप्‍त सूचनाओं की संवीक्षा और विश्‍लेषण का नेतृत्‍व किया और बाद में सिफारिशें जेलों के संबंधित अधीक्षकों को एक कार्रवाई रिपोर्ट फाइल करने के निदेश के साथ भेजी गई।

उन्‍होंने देश भर के मनोरोग गृहों का बारंबार निरीक्षण किया है। उनके नेतृत्‍व में आयोग ने मनोरोग गृहों के कामकाज में कुछ सुधार लाने जैसे कि महिला कैदियों के लिए परामर्श, उपलब्‍ध चि‍कित्‍सा सेवाओं के अपने परिवार के सदस्‍यों को सूचित करना और पूरे पाठ्यक्रम के दौरान महिला कैदियों के परिवार के सदस्‍यों की अनिवार्य भागीदारी, दूसरों के बीच में उनके उपचार की भी सिफारिश की हैं।

श्रीमती शर्मा महिलाओं को स्‍वतंत्र और आत्‍मनिर्भर बनाने की मुखर समर्थक रही हैं और जिसके एक हिस्‍से के रूप में आयोग ने एमएसएमई के कौशल के लिए इन एमएसएमई की क्षमता और उत्‍पादकता में सुधार करने के लिए एमएसएमई मंत्रालय के साथ मिलकर महिलाओं के नेतृत्‍व वाले उद्यम, प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी, वित्‍तीय सहायता और बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए बाजार तक पहुंच पर परामर्श का आयोजन किया है।

उन्‍होंने लगातार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की वकालत की है और वह समाज में व्‍याप्‍त लैंगिक रूढि़यों को तोड़ने के उद्देश्‍य से विभिन्‍न विश्‍वविद्यालयों के साथ मिलकर महिलाओं के नेतृत्‍व वाली उद्यमिता जैसी संगोष्‍ठी का आयोजन करती रही हैं।      

श्रीमती कमलेश गौतम
सदस्य 19 Nov 2018

श्रीमती कमलेश गौतम ने राष्‍ट्रीय महिला आयोग में सदस्‍य के रूप में तारीख 19 नवंबर, 2018 को पदभार ग्रहण किया।

श्रीमती गौतम उत्‍तर प्रदेश राज्‍य की निवासी है।

श्रीमती कमलेश गौतम के पास कानपुर विश्‍वविद्यालय से स्‍नात्‍तकोत्‍तर डिग्री है। वे वर्ष 1995 से उत्‍तर प्रदेश में जिला स्‍तर पर कई युवा और महिला उन्‍मुखी संगठनों की सक्रिय सदस्‍य रही हैं। श्रीमती गौतम शिक्षा के माध्‍यम से बालकों को सशक्‍त करने के लिए कार्यरत एक गैर सरकारी संगठन श्री साई सेवा शिक्षण संस्‍था के अध्‍यक्ष के पद पर भी विराजमान रही।   

श्रीमती चन्द्रमुखी देवी
सदस्य 26 Nov 2018

श्रीमती चंद्रमुखी देवी ने राष्‍ट्रीय महिला आयोग में सदस्‍य के रूप में तारीख 26 नवंबर, 2018 को पदभार ग्रहण किया।

श्रीमती चंद्रमुखी देवी हिंदी साहित्‍य सम्‍मेलन से स्‍नातक है। वर्ष 1988 से श्रीमती चंद्रमुखी देवी महिलाओं से संबंधित कई संगठनों में विभिन्‍न पदों पर आसीन रही।  

वर्ष 1995 में श्रीमती चंद्रमुखी देवी तत्‍कालीन अविभाजित बिहार राज्‍य विधानमंडल के लिए निर्वाचित हुई और बिहार में खगडि़या निर्वाचन क्षेत्र से पहली महिला विधायक बनी। इसी वर्ष उन्‍हें महिला एवं बाल विकास समिति के लिए नामनिर्देशित किया गया।

श्रीमती चंद्रमुखी देवी ने समाज कल्‍याण बोर्ड समिति निपसिड के सदस्‍य के रूप में भी कार्य किया। वर्ष 2010 में उन्‍हें कपार्ट (दि कांउसिल फॉर एडवांसमेंट ऑफ़ पीपल्‍स एक्शन एंड रूरल टेक्नोलॉजी) का सदस्‍य बनाया गया। इससे पहले वे बिहार सरकार के बीस सूत्रीय कार्यक्रम के उपाध्‍यक्ष के पद पर विराजमान रही।

श्रीमती चंद्रमुखी देवी वर्ष 2011-2014 तक बिहार राज्‍य महिला आयोग की सदस्‍य रही।       

श्रीमती श्यामला एस० कुंदर
सदस्य 7 Mar 2019

श्रीमती श्‍यामला एस. कुंदर ने तारीख 07 मार्च, 2019 को राष्‍ट्रीय महिला आयोग में सदस्‍य के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्‍होंने कारकला में सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी महाविद्यालय से पीयूसी की परीक्षा उत्‍तीर्ण की और तत्‍पश्‍चात् उन्‍होंने मैसूर (मैसूर विश्‍वविद्यालय से संबद्ध) में हिंदी रत्‍न में डिग्री प्राप्‍त की तथा कर्नाटक राज्‍य ओपन विश्‍वविद्यालय से एम.ए. की डिग्री प्राप्‍त की। श्रीमती कुंदर ने सामाजिक मुद्दों, जैसे कि महिलाओं की स्थिति में सुधार करने, में भी दिलचस्‍पी ली। वर्ष 1996 में ‘फीमेल एनर्जी सेल्फ हेल्प एसोसिएशन’ के माध्‍यम से एक उडुपी जिला संसाधक के रूप में कार्य किया। वे उडुपी श्रीराजका याने मादीवाला संघ की पहली महिला अध्‍यक्ष थी। श्रीमती कुंदर मनिपाल कनिष्‍ठ महाविद्यालय, न्‍यास, डुपी श्री मनिपाल की एक ख्‍यातिप्राप्‍त संस्‍था में माता-पिता शिक्षक एसोसिएट के रूप में कार्य किया। उन्‍होंने उडुपी की महिला शक्ति सहकारी समिति के उपाध्‍यक्ष के रूप में भी कार्य किया। वे कारकला तालुक में अंडार अजाकर देवस्‍थान में श्री जगदम्‍बा न्‍यास की महासचिव भी रही।

श्रीमती कुंदर वर्ष 2006 से 2008 तक 80 बडागुबेट्टू ग्राम पंचायत के अध्‍यक्ष के रूप में निर्वाचित हुई। उन्‍होंने उस समय संगठन के लिए ग्रामीण स्‍तर पर एक मुख्‍य भूमिका निभाई। 80वीं बडागुबेट्टू ग्राम पंचायत में अपनी पदावधि के दौरान ‘‘माधारी ग्राम पंचायत’’ के लिए  उनका चयन किया गया था। वर्ष 2012 में वे उडुपी जिले का प्रतिनिधित्‍व करने वाली पहली महिला थी।

श्रीमती कुंदर वर्ष 1996 से महिलाओं से संबंधित विभिन्‍न संगठनों में विभिन्‍न हैसियत से भी जुड़ी रही है। वे पंचायत महिला शक्ति अभियान की उपाध्‍यक्ष भी रही।

डॉ राजुलबेन एल० देसाई
सदस्य 8 Mar 2019

डा. राजुलबेन एल. देसाई ने तारीख 08 मार्च, 2019 को राष्‍ट्रीय महिला आयोग में सदस्‍य के रूप में पदभार ग्रहण किया। इससे पहले वे प्रधानाचार्य विधि महाविद्यालय, डीसा (बी.के.) गुजरात के पद पर थी। उन्‍होंने मनोविज्ञान और विधि में स्‍नातक की डिग्री प्राप्‍त की। डा. देसाई ने अपराध विज्ञान में एलएलएम की डिग्री प्राप्‍त की और विधि, विकास एवं लिंग असमानता में पीएचडी की है। उन्‍होंने बनासकंठा जिले में की महिलाओं की स्थिति पर अनुसंधान भी किया है। वे गुजरात राज्‍य की प्रख्‍यात शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं तथा उन्‍होंने महिला और बालकों के कल्‍याण के लिए व्‍यापक रूप से कार्य किया है। डा. देसाई विधि महाविद्यालय, पालनपुर, महसाना, मणिनगर, अहमदाबाद में आचार्य और सहायक आचार्य के रूप में जून, 2005 से अप्रैल 2012 और अगस्‍त 2012 से फरवरी 2014 तक कार्यरत रही। वे मई 2017 से मार्च 2019 तक बालकों के अधिकारों के संरक्षण के लिए गुजरात राज्‍य आयोग की सदस्‍य भी रही। उन्‍होंने गुजरात में मालधारी समुदाय के लिए विभिन्‍न बालिका शिक्षा जागरूकता के कई आंदोलन आयोजित किए। डा. देसाई ने गुजरात राज्‍य में बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं अभियान, गुड टच और बेड टच अभियान तथा महिला सशक्तिकरण अभियान भी संचालित किए। उन्‍होंने राजस्‍थान में देवासी समुदाय के लिए बालिका शिक्षा अभियान भी संचालित किया।

डा. देसाई ने विधि से संबंधित कई पुस्‍तकें भी लिखी हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 (कार्यान्‍वयन), परिसीमा अधिनियम, अधिवक्‍तृता का प्रति परीक्षा अधिनियम (cross examination act of advocacy), भारत में महिलाओं और कार्यान्‍वयन पर अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन और 21वीं सदी में महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन, उनकी प्रकाशित पुस्‍तकें है।

डा. देसाई को वर्ष 2018 में अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ‘‘श्रेष्‍ठ महिला पुरस्‍कार’’ से सम्‍मानित किया गया। डा. देसाई ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्‍यम से घरेलू हिंसा, लैंगिक उत्‍पीड़न, महिलाओं की सामाजिक स्थिति और महिलाओं की निजता की बाबत अपने विचार और मत सक्रिय रूप से साझा करती है। डा. राजुलबेन एल. देसाई ने राज्‍य स्‍तर, राष्‍ट्रीय स्‍तर और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर महिला सशक्तिकरण और कल्‍याण से संबंधित कार्यक्रमों में भी भाग लिया है।

सुश्री मीता राजीवलोचन
सदस्य सचिव 8 Jan 2020